shri gajanan maharaj in Hindi एक ऐसे संत जो गणेश जी का अवतार माने जाते है।
1) प्रगट दिन
२३ फरवरी १९७८ इस दिन श्री गजानन महाराज शेगांव में प्रगट हुए।यह संत प्रगट हुए संतो की भूमि महाराष्ट्र में, महाराष्ट्र के बुलढाना जिले में शेगांव गांव में ये पहली बार दिखाई दिए, मान्यता के अनुसार सन १८८७ मे ये संत सबसे पहले पीपल के पेड़ के नीचे गांव के गृहस्थ श्री बंकटलाल जी को दिखाई पड़े, जो झुटी पत्राली पर का अन्न खा रहे थे। `shri gajanan maharaj in Hindi'
यह देख कर बंकट लाल जी ने उन्हे अच्छा भोजन देना चाहा लेकिन उन्होंने लेने से मना कर दिया और कहा अन्न ही पूर्ण ब्रह्म होता है उसे हमे बर्बाद नही करना चाहिए ऐसी सबसे बड़ी शिक्षा उन्होंने दी और वहा से अचानक गायब हो गए।
जब गांव में रात में मंदिर में कीर्तन चालू था तब महाराज दूसरी बार दिखाई दिए और संस्कृत मे श्लोक बताने लगे यैसा देख कर गांव के लोग आचर्यचकित हो गए ,
और गांव वालो ने महाराज जी को पूछा कि आप कौन हो उस पर महाराज जी ने कहा में शिव पुत्र गजानन हू ऐसा महाराज जी ने उत्तर दिया तभी से सभी लोग उन्हें गजानन महाराज कहते हैं।shri gajanan maharaj in Hindi
बाद मे भक्तो के आग्रह पर गजानन महाराज वहीं पर शेगांव में स्थित हुए ।
२) कार्यकाल
गजानन महाराज का कार्यकाल १८७८ से १९१० का माना जाता है ।३२ साल के इस काल मे अनेकों चमत्कार गजानन महाराज ने दिखाए अपने भक्तो के संकट दूर किए अपने भक्तो को मार्गदर्शन किया।shri gajanan maharaj in Hindi
३) अवतार
गजानन महाराज जी को नाथ संप्रदाय का माना जाता है उन्हे श्री स्वामी समर्थ जी का अवतार माना जाता है।
मान्यता के अनुसार श्री स्वामी समर्थ महाराज को गजानन महाराज अपना गुरु मानते थे। वैसे देखा जाये तो दोनो के चमत्कार भी समान है | श्री स्वामी समर्थ दत्तप्रभु जी का तीसरा पूर्णावतार माना जाता है |
गजानन महाराज जी ने बहुत सारे चमत्कार किये है जग के कल्याण के लिए भगवान ने खुद गजानन महाराज के रूप में अवतार लिया है ऐसा माना जाता है | समय समय पर गजानन महाराज ने भक्तो को शिक्षा भी दी , महाराज ने अनेको भक्तो को सहारा दिया | महाराज गांव के शिव मंदिर में पूजा करते थे | "shri gajanan maharaj in Hindi"
४) समाधि स्थल और मंदिर
श्री संत गजानन महाराज ने संजीवन समाधी ८ सप्तेम्बर १९१० को ली। इसी समाधि पर मंदिर बनाया गया है। जो की भक्तो को दर्शन के लिए खुला है। इस मंदिर में जाने के बाद आपको गजाजन महाराज के होने का अहसास होगा। सच्चे भक्त को गजानन महाराज आज भी दर्शन देते हैं। ऐसी मान्यता है।
शेगाव मंदिर
शेगाव के मंदिर के बारे जीतनी प्रशंशा की उतनी कम है , शेगाव को विदर्भ का पंढरपुर भी कहा जाता है |
शेगाव के मंदिर में कोई दर्शन के लिए कोई vip लाइन नहीं है सबको लाइन में लगके ही दर्शन मिलता है | बात करे मंदिर की व्यवस्था की तो दुनिया में सबसे अच्छी व्यवस्था आपको इस मंदिर में देखने को मिलेगी |
यहाँ का मैनेजमेंट इतना जबरदस्त है की आप देखकर हैरान हो जायेगे | इस मंदिर में दूर दूर से श्रद्धालु गजानन महारज जी के दर्शन के लिए आते है , और अपनी श्रद्धा से दान करते है | shri gajanan maharaj in Hindi
शेगाव के इस भव्य मंदिर में सभी व्यवस्था है यहाँ पर रहने की ,खाने की पुरतः सोय सुविथा उपलब्ध है , यहाँ के सभी कर्मचारी आने वाले भक्तो का बहुत ही अच्छी तरीके से ध्यान रखते है |
कहाँ जाता है की यहाँ के कर्मचारी अपने काम का मोबदला नहीं लेते है उनका मानना है की भक्तो की सेवा ही हमारा सबसे बड़ा मोबदला है , भक्तो की सेवा करने का हमें सौभाग्य प्राप्त हुआ है।
५)आनंद सागर
शेगाव में आकर्षित करने वाला स्थान है आनंद सागर यह सबसे बड़ा उद्यान है। यहां पर आकर्षित करने वाली झील बनाई गई है उसे देख कर पर्यटकों को आनंद महसूस होता है। यहां पर ग्रीन गार्डन देखने को मिलता है।
गजानन महाराज जी अपने भक्तो बहुत ही ध्यान रखते हैं उन्हीं भक्त मे से एक भक्त श्री दासगणु महाराज जी ने महाराज जी की जीवनी लिखी है उसे आप अवश्य पढ़े gajanan maharaj
यह २१ अध्याय की जीवनी है उसे पढ़ कर आप गजानन महाराज जी की महिमा जान सकते हैं।
संत गजानन महाराज संस्थान विदर्भ क्षेत्र में सबसे बड़ा मंदिर ट्रस्ट है।
भारत देश के राज्य महाराष्ट्र के जिला बुलढाणा तहसील शेगांव में स्थित है । यहां पर जाने के लिए सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध है। आप यहां पर बस , ट्रेन से जा सकते है।shri gajanan maharaj in Hindi
६) गजानन महाराज के चमत्कार
श्री संत गजानन महाराज के चमत्कार की बात करे तो उन्होंने बहुत सारे चमत्कार अपने भक्तों के कल्याण के लिए किए है । एक बार श्री संत गजानन महाराज आकोली जहागीर से खेतो की और जा रहे थे, तभी उनको प्यास लगी तभी गांव के एक किसान जिनका नाम था भास्कर पाटील वो अपने खेत में काम कर रहे थे। साथ में ही कुछ मजदूर भी उनके खेत में काम कर रहे थे। तभी महाराज की नजर पेड़ के नीचे पड़े मटके पर पड़ी और वो पानी लेने लगे, तभी भास्कर पाटील ने उन्हें पानी लेने से इंकार किया और कहा यहां से चले जाओ ये पानी तुम्हारे लिए नही है। तभी महाराज ने कहा की तुम्हारे खेत में इतना बड़ा कुआ होने के बाद भी पानी पीने के लिए मना करते हो। तभी भास्कर पाटील ने कहा की इस कुएं में पाणी नही है पानी लाने के लिए बहुत दूर जाना पड़ता है। तभी महाराज ने कुएं मे देखा और चमत्कार हो गया कुएं में पानी आ गया। ये सब देख कर भास्कर पाटील महाराज के चरन पकड़ लिए और शमा मांग ने लगे। तभी से भास्कर पाटील श्री गजानन महाराज के भक्त हुए। gajanan maharaj
एक दिन श्री गजानन महाराज बच्चो के साथ खेल रहे थे तभी उन्हें चिलम पीनी थी तब उन्होंने बच्चो को कहा जाओ उस जानकीराम सोनार से चिलम जलाने के लिए कोयला लेकर आओ तभी सारे बच्चे सोनार के पास गए और महाराज को जला हुआ कोयला चाहिए उन्हे चिलम पीनी है। तभी सोनार बच्चो को कोयला देने से इंकार किया और महाराज के बारे गलत बोलने लगा सभी बच्चे वहसे भागकर श्री गजानन महाराज के पास आए और सोनार ने कोयला देने से इंकार किया ऐसा बच्चो ने महाराज को बताया। तभी महाराज ने एक बच्चे से कहा की वो सुखी लकड़ी उठाओ और इस चिलम पर लगाओ उस बच्चे ने लकड़ी चिलम पर लगाई तो सच मे चिलम जली और उसमे से धुआं निकलने लगा। यह देख कर सभी बच्चे हैरान हो गए।
ऐसे अनेकों चमत्कार श्री गजानन महाराज ने अपने कार्यकाल में किए हैं।
७) क्यों गजानन महाराज चिलम पीते हैं
संत गजानन महाराज बंकट लाल जी के घर पर बैठे थे। तभी एक संन्यासी बाबा भगवा वस्त्र धारण किए हुए श्री गजानन महाराज के दर्शन के लिए आए थे। वे काशी से महाराज के दर्शन करने आए थे। भगवान भोले नाथ को उन्होंने चिलीम देने का नवस बोला था। वही नवस पूरा करने के लिए वो शेगांव में आए थे। श्री गजानन महाराज को देखकर वो प्रसन्न हो गए लेकिन सभी सात्विक वृत्ति वाले भक्तों को देखकर वे संन्यासी महाराज को चिलम कैसे दू इसका मन में ही विचार नकरने लगे तभी गजानन महाराज ने कहा नवस बोलते समय क्यों नहीं सोचा अब लाओ वो चिलम मुझे दो। तभी संन्यासी ने वो चिलम श्री गजानन महाराज को दी, और कहा की इसे आप हमेशा अपने पास रखना। तभी से गजानन महाराज अपने पास वो चिलम रखते हैं।
८) गजानन महाराज की बावनी
जय जय सदगुरु गजनाना । रक्षक तूची भक्तजना।।१।।
निर्गुण तू परमात्मा तू। सगुण रुपात गजानन तू।।२।।
सदेह तू परी विदेह तू।देह असून देहातीत तू।।३।।
माघ वैद्य सप्तमी दिनी । शेगावात प्रगटोनी ।।४।।
उष्ट्या पत्रावळीनिमित्त। विदेहत्व तव हो प्रगट ।।५।।
बंकट लालावरी तुझी।कृपा जहाली ती साची।।६।।
गोसव्याच्या नवसासाठी । गांजा घेसी लावुन ओठी ।।७।।
तवपद तीर्थे वाचविला ।जानराव तो भक्त भला ।।८।।
जानकीरामा चिंचवणे। नासवोणी स्वरुपी आणणे ।।९।।
मुकिन चंदू चे कानवले।खाऊन कृतार्थ त्या केले।।१०।।
विहिरी माजी जलविणा । केला देवा जलभरणा ।।११।।
मध माश्यांचे डंख तुवा । सहन सुखे केले देवा।।१२।।
त्याचे काटे योगबळे । काढून सहजी दाखविले ।।१३।।
कुस्ती हरिशी खेलोनी । शक्ति दर्शन घडवोनी।।१४।।
वेद म्हणुनी दाखविला। चकीत द्रविड ब्राम्हण झाला।।१५।।
जळत्या पर्यकावरती |ब्रम्हगिरीला ये प्रचिती ||१६||
टाकळीकर हरीदासाचा | अश्व शांत केला साचा||१७||
बाळकृष्ण बाळापूराचा | समर्थ भक्ताची जो होता ||१८||
रामदास रूपे तुला | दर्शन देऊनी तोषविला ||१९||
सुकुलालाची गोमाता | द्वाड बहु होती ताता ||२०||
कृपा तुझी होताच क्षणी | शांत जाहली ती जननी ||२१|| घुडे लक्ष्मण शेगावी | येता व्याधी तू निरवी ||२२||
दांभिकता परी ती त्याची | तू न चालवोनी घे साची ||२३|| भास्कर पाटील तव भक्त | उद्धरलासी तू त्वरित ||२४|| आज्ञा तव शिरसावंद्य | काकाही मानती तुज वंद्य ||२५|| विहिरीमाजी रक्षियला | देवा तू गणू जवरयाला ||२६|| पिताम्बराकार्वी लीला | वठला आंबा पल्लवीला ||२७|| सुबुद्धी देशी जोश्याला | माफ करी तो दंडाला ||२८|| सवडत येशील गंगाभारती | थुंकून वारिली रक्तपिती ||२९|| पुंडलिकाचे गंडांतर | निष्टा जाणून केले दूर ||३०|| ओंकारेश्वरी फुटली नौका | तारी नर्मदा क्षणात एका ||३१|| माधवनाथा समवेत | केले भोजन अदृष्ट ||३२||
लोकमान्य त्या टिळकांना | प्रसाद तूची पाठविला ||३३|| कवर सुताची कांदा भाकर | भक्शिलास तू त्या प्रेमाखातर ||३४||
नग्न बैसोनी गाडीत | लीला दाविली विपरीत ||३५||
बायजे चित्ती तव भक्ती | पुंडलीकावारी विरक्त प्रीती ||३६|| बापुना मनी विठल भक्ती | स्वये होशी तू विठ्ठल मूर्ती ||३७|| कवठ्याच्या त्या वारकऱ्याला | मरीपासुनी वाचविला ||३८|| वासुदेव यती तुज भेटे | प्रेमाची ती खुण पटे ||३९||
उद्धट झाला हवालदार | भस्मीभूत झाले घरदार ||४०|| देहान्ताच्या नंतरही | कितीजना अनुभव येई ||४१||
पडत्या मजूर झेलीयेले | बघती जन आश्चर्य भले ||४२|| अंगावरती खांब पडे | स्त्री वांचे आश्चर्य घडे ||४३|| गजाननाच्या अद्भुत लीला | अनुभव येती आज मितीला ||४४||
शरण जाऊनी गजानना | दुक्ख तयाते करी कथना ||४५|| कृपा करी तो भक्तांसी | धावून येतो वेगेसी ||४६|| गजाननाची बावन्नी | नित्य असावी ध्यानी मनी ||४७|| बावन्न गुरुवार नेमे | करी पाठ बहु भक्तीने ||४८||
विघ्ने सारी पळती दूर | सर्व सुखांचा येई पूर ||४९||
चिंता सारया दूर करी | संकटातूनी पार करी ||५०||
सदाचार रत साद भक्ता | फळ लाभे बघता बघता ||५१|| जय बोला हो जय बोला | गजाननाची जय बोला ||५२||
दास गणु महाराज ने श्री संत गजानन महाराज पर २१अध्याय की पुस्तक लिखी है जिसका नाम है "श्री गजानन महाराज विजय ग्रंथ"
श्री संत गजानन महाराज महामाला मंत्र
ॐ नमो भगवते गजाननाय । दर्शन मात्र दुःख दहनाय।
विदेह देह दिगंबराय। आनंद कंद सच्चिदानंदाय।
परमहंसाय अवधूताय। मनोवांछित फलप्रदाय।
अयोनि संभव महासिद्याय। गण गण गणात बोते महामंत्राय।
सर्व यंत्र मंत्र स्वरूपाय। सर्व सम्पुट पल्लव स्वरूपाय।
ॐ नमो महापुरुषय स्वाहा
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